राक्षस का वध करने के बाद भी माँ काली का क्रोध शांत नहीं हुआ。 उनका उग्र रूप इतना विकराल हो गया कि वह विनाश के तांडव में लीन हो गईं。 उनके क्रोध और भय से पूरी सृष्टि डगमगाने लगी。शिव का शांत रूप और काली का पैर:जब कोई भी देवता माँ काली के गुस्से को शांत नहीं कर सका, तब सभी ने भगवान शिव से प्रार्थना की。 इस विनाश को रोकने के लिए, स्वयं भगवान शिव (परम चेतना) युद्ध के मैदान में शवों के बीच लेट गए。गुस्से की अवस्था में माँ काली को कुछ भी होश नहीं था。 जब वह नृत्य करते हुए आगे बढ़ीं, तो अनजाने में उनका पैर सीधे भगवान शिव की छाती पर पड़ गया
